आबिद सुरती: बहुआयामी कलाकार, प्रख्यात लेखक और सामाजिक चेतना के अग्रदूत भारतीय कला, साहित्य और कॉमिक्स जगत में आबिद सुरती एक ऐसा अनूठा नाम हैं जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से कई विधाओं को समृद्ध किया है। वे एक साथ कुशल चित्रकार, व्यंग्यकार, उपन्यासकार, पटकथा लेखक और पर्यावरण कार्यकर्ता की भूमिका सहजता से निभाते हैं। जन्म और प्रारंभिक जीवन जन्म: 5 मई 1935 को गुजरात के भरूच जिले के वागरा गाँव में हुआ। बचपन और संघर्ष: उनका प्रारंभिक जीवन मुंबई की चालों में घोर आर्थिक संघर्ष और पानी की भारी किल्लत के बीच बीता। इसी कठिन पृष्ठभूमि ने उनकी संवेदनशीलता और भविष्य के सामाजिक सरोकारों को आकार दिया। कलात्मक शिक्षा और पृष्ठभूमि उन्होंने मुंबई के प्रतिष्ठित सर जे. जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स से 1954 में अपनी औपचारिक कला शिक्षा पूरी की। यहाँ से मिले शास्त्रीय कलात्मक प्रशिक्षण ने उनकी रेखाओं और दृश्यकला को एक ठोस आधार प्रदान किया। कला शैली और दृश्य विशेषताएं 1. अभिव्यंजक रेखांकन: उनकी ड्राइंग शैली में न्यूनतम रेखाओं के साथ अधिकतम भाव संप्रेषित करने की अद्भुत क्षमता है। 2. कैरिकेचर औ...
भारतीय कला एवं व्यावहारिक कला: 25 महत्वपूर्ण प्रश्न (Set-24) विशेष बहुविषयक अभ्यास सेट | Kalalekhan.com 1. उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में सुयाल नदी के तट पर स्थित किस प्रागैतिहासिक गुफा से मानव आकृतियों के समूह नृत्य के चित्र मिले हैं? (A) लखुडियार (Lakhudiyar) (B) हुडली (C) कसारदेवी (D) फलसीमा 👉 सही उत्तर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें उत्तर: (A) लखुडियार (Lakhudiyar - इसका शाब्दिक अर्थ 'एक लाख गुफाएं' है) 2. सातवाहन काल में विकसित 'अमरावती स्तूप' की मूर्तियों के निर्माण में मुख्य रूप से किस पत्थर का प्रयोग हुआ? (A) सफेद पलिश्दार संगमरमर / चूना पत्थर (White Marble / Palnad Limestone) (B) लाल बलुआ पत्थर (C) स्लेटी शिस्ट (D) बेसाल्ट 👉 सही उत्तर देखने के लिए यहाँ क्लिक करें उत्तर: (A) सफेद पलिश्दार संगमरमर / चूना पत्थर 3. अजंता की किस गुफा में बुद्ध का 'मार विजय' (Mara Vijaya) दृश्य भित्तिचित्र एवं विशाल पाषाण मूर्ति दोनों रूपों मे...